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सरकारी टेंडर कैसे भरें: ऑनलाइन टेंडर भरने की पूरी प्रक्रिया, स्टेप बाय स्टेप

PAN, GST और DSC से लेकर पोर्टल रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन बिड, टेंडर खुलने और अवॉर्ड तक: सरकारी टेंडर कैसे भरा जाता है, आसान हिंदी में पूरी प्रक्रिया।

लेखक: GovtTenderHub संपादकीय टीमअपडेट 11 मिनट में पढ़ें

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संक्षेप में

  • एक बार की तैयारी: फर्म का PAN, GST रजिस्ट्रेशन, फर्म के नाम पर बैंक अकाउंट, माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ हैं तो Udyam रजिस्ट्रेशन, और एक Class 3 डिजिटल सिग्नेचर (DSC)।
  • जहाँ खरीदार हैं, वहाँ रजिस्टर करें: सामान और सर्विस के लिए GeM पर सेलर अकाउंट, और वर्क्स व बाकी टेंडरों के लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल (केंद्र, PSU या राज्य के) पर बिडर एनरोलमेंट।
  • हर टेंडर में: पूरा टेंडर डॉक्यूमेंट पढ़ें, देखें कि आप पात्रता (eligibility) पूरी करते हैं, EMD, टेंडर फीस और तारीखें नोट करें, और जो समझ न आए वह प्री-बिड मीटिंग में पूछें।
  • आखिरी समय से पहले ऑनलाइन बिड जमा करें। पहले टेक्निकल बिड खुलती है; प्राइस बिड सिर्फ उन फर्मों की खुलती है जो क्वालिफाई करती हैं। आमतौर पर सबसे कम क्वालिफाइड रेट (L1) वाले को टेंडर मिलता है।
  • टेंडर मिलने के बाद: लेटर ऑफ अवॉर्ड स्वीकार करें, परफॉर्मेंस सिक्योरिटी दें (सामान और सर्विस में 3–5%), कॉन्ट्रैक्ट साइन करें और सप्लाई या काम पूरा करें।

भारत में सरकारी विभाग हर साल लाखों करोड़ रुपये की खरीद टेंडर से करते हैं, और अब लगभग सारी बिडिंग ऑनलाइन होती है। खरीदार चाहे ग्राम पंचायत हो या केंद्र सरकार का कोई मंत्रालय, तरीका एक ही है: टेंडर ढूँढिए, पात्रता पूरी कीजिए, समय पर बिड भरिए, और रेट के आधार पर (या क्वालिटी और रेट दोनों के आधार पर) टेंडर जीतिए। बदलता सिर्फ पोर्टल और कागज़ात है। सरकारी टेंडर कैसे भरा जाता है, यह नीचे क्रम से समझाया गया है।

पहला कदम: तय करें कि किस काम का टेंडर भरना है

सरकारी टेंडर मोटे तौर पर तीन तरह के होते हैं:

  • सामान (Goods): कंप्यूटर, फर्नीचर, दवाइयाँ, गाड़ियाँ जैसी चीज़ों की सप्लाई।
  • सर्विस: मैनपावर, सिक्योरिटी, हाउसकीपिंग, ट्रांसपोर्ट, मेंटेनेंस, कंसल्टेंसी।
  • वर्क्स (निर्माण कार्य): सड़क, बिल्डिंग, पानी की सप्लाई और बिजली की फिटिंग का निर्माण और मरम्मत।

वही काम चुनें जिसका अनुभव आप कागज़ पर साबित कर सकें, और उसी इलाके में जहाँ आप काम संभाल सकें। टेंडर में अक्सर पिछले तीन से पाँच साल में मिलते-जुलते काम (similar work) का अनुभव और एक न्यूनतम टर्नओवर माँगा जाता है। शुरुआत अपने ज़िले या राज्य के छोटे टेंडरों से करें। इन्हीं से वह रिकॉर्ड बनता है जो बड़े टेंडरों में चाहिए।

दूसरा कदम: ज़रूरी रजिस्ट्रेशन करवाएँ

लगभग हर टेंडर में ये चीज़ें चाहिए:

  1. फर्म का PAN।
  2. GST रजिस्ट्रेशन।
  3. फर्म के नाम पर करंट अकाउंट।
  4. माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ हैं तो Udyam रजिस्ट्रेशन। यह udyamregistration.gov.in पर मुफ्त होता है, और इससे EMD में छूट और दूसरे फायदे मिलते हैं। देखें सरकारी टेंडर में MSME को मिलने वाले फायदे (अंग्रेज़ी में)।
  5. आपके काम के लिए ज़रूरी लाइसेंस: वर्क्स के लिए PWD या किसी दूसरे विभाग में ठेकेदार के तौर पर एनलिस्टमेंट (enlistment), बिजली के काम के लिए इलेक्ट्रिकल लाइसेंस, सिक्योरिटी सर्विस के लिए PSARA लाइसेंस, दवाइयों के लिए ड्रग लाइसेंस, वगैरह।

पूरी लिस्ट, और किस टेंडर में आमतौर पर क्या माँगा जाता है, डॉक्यूमेंट चेकलिस्ट (अंग्रेज़ी में) में है।

तीसरा कदम: Class 3 डिजिटल सिग्नेचर (DSC) लें

NIC के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टलों पर बिड Class 3 डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) से साइन होती है, जो एक USB टोकन में आता है। यह लाइसेंस वाली सर्टिफाइंग अथॉरिटी (CA) से खरीदा जाता है। आमतौर पर एक-दो दिन में मिल जाता है और एक से तीन साल तक चलता है। साइनिंग और एन्क्रिप्शन सर्टिफिकेट में क्या फर्क है और कौन सा लेना है, यह DSC गाइड (अंग्रेज़ी में) में है।

चौथा कदम: ज़रूरी पोर्टलों पर रजिस्टर करें

सारे सरकारी टेंडरों के लिए कोई एक पोर्टल नहीं है। कौन सा विभाग कहाँ टेंडर डालता है, यह टेंडर पोर्टल गाइड (अंग्रेज़ी में) में है। संक्षेप में:

  • GeM (gem.gov.in): General Financial Rules के Rule 149 के तहत केंद्र सरकार के मंत्रालयों को जो सामान और सर्विस GeM पर उपलब्ध है, वह GeM से ही खरीदनी होती है। कई राज्य और PSU भी GeM से खरीदते हैं। यहाँ सेलर अकाउंट बनाएँ; पूरा तरीका GeM रजिस्ट्रेशन कैसे करें में है।
  • NIC ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल: केंद्र सरकार का eprocure.gov.in, PSU के लिए etenders.gov.in, रक्षा (Defence) के लिए defproc.gov.in, और ज़्यादातर राज्यों का अपना पोर्टल। हर पोर्टल पर Online Bidder Enrollment में फॉर्म भरें, फिर लॉग इन करके अपना DSC रजिस्टर करें। हर पोर्टल पर अलग से एनरोल करना होता है, और एक अकाउंट में एक DSC चलता है। नया रजिस्टर किया DSC चालू होने में 24 घंटे तक लग सकते हैं, इसलिए यह काम डेडलाइन से एक दिन पहले के लिए न छोड़ें। NIC बिडर से एनरोलमेंट का कोई पैसा नहीं लेता, हालाँकि अपना पोर्टल खुद चलाने वाला कोई संगठन ले सकता है।
  • दूसरे सिस्टम: कुछ राज्य (कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, छत्तीसगढ़) और रेलवे (IREPS) अपने अलग पोर्टल चलाते हैं, जिन पर रजिस्ट्रेशन भी अलग होता है।

पाँचवाँ कदम: अपने काम के टेंडर ढूँढें

पोर्टलों पर टेंडर "Active Tenders" या "Tenders by Organisation" में मिलते हैं। रोज़ कई पोर्टल खोलकर देखने में बहुत समय जाता है, इसलिए सब में एक साथ खोजें: GovtTenderHub पर GeM, CPPP और NIC पोर्टलों के लाइव टेंडर एक जगह मिलते हैं, जो दिन में कई बार अपडेट होते हैं। राज्य, कैटेगरी या कीवर्ड से छाँटें, और किसी सर्च को फ़ॉलो करें ताकि हर बार दिखे कि नया क्या आया है।

ऐसे टेंडर चुनें जिनकी पात्रता आप साफ़ तौर पर पूरी करते हों, जिनकी वैल्यू आपकी क्षमता के हिसाब से हो, और जिनकी आखिरी तारीख तक तैयारी का समय हो। केंद्र सरकार के टेंडरों में आमतौर पर टेंडर छपने से बिड जमा करने तक कम से कम तीन हफ्ते का समय दिया जाना चाहिए (Rule 161)।

दूसरे राज्य के टेंडर भी भर सकते हैं, जब तक टेंडर में पात्रता सीमित न की गई हो, जैसे सिर्फ उसी राज्य के PWD में रजिस्टर्ड ठेकेदार। यह पात्रता वाले हिस्से में लिखा होता है।

छठा कदम: टेंडर डॉक्यूमेंट पूरा पढ़ें

टेंडर डॉक्यूमेंट (अक्सर NIT, यानी notice inviting tender, और उसके annexure) ही वह कॉन्ट्रैक्ट है जिसकी शर्तें आप मान रहे हैं। बिड पर पैसा और समय लगाने से पहले इसे पूरा पढ़ें। खास तौर पर ये चीज़ें देखें:

  • पात्रता (Eligibility): टर्नओवर, अनुभव, रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट। इनमें से एक भी शर्त पूरी नहीं हुई तो रेट कितना भी अच्छा हो, बिड बाहर हो जाएगी।
  • काम का दायरा और स्पेसिफिकेशन: ठीक-ठीक क्या सप्लाई करना या बनाना है, कहाँ और कब तक।
  • BOQ (bill of quantities): वे आइटम और मात्रा जिनका रेट आप भरते हैं। NIC पोर्टलों पर यह एक Excel फाइल होती है, जिसे भरकर अपलोड करना होता है।
  • EMD और टेंडर फीस: कितनी है, कैसे भरनी है, और क्या आपको छूट मिल सकती है। देखें EMD क्या है।
  • ज़रूरी तारीखें: प्री-बिड मीटिंग, सवाल भेजने की आखिरी तारीख, बिड जमा करने की डेडलाइन और बिड खुलने की तारीख।
  • पेमेंट की शर्तें, पेनल्टी और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी।
  • Corrigendum (शुद्धिपत्र): टेंडर छपने के बाद किए गए बदलाव। बिड जमा करने से पहले इन्हें हर बार ज़रूर देखें।

कोई बात साफ़ न हो तो सवाल भेजने की आखिरी तारीख से पहले लिखित में या प्री-बिड मीटिंग में पूछें। खरीदार के जवाब सभी बिडरों के लिए छपते हैं, और इनसे टेंडर की शर्तें बदल भी सकती हैं।

सातवाँ कदम: ऑनलाइन टेंडर कैसे भरें

ज़्यादातर टेंडर दो कवर वाले होते हैं (इन्हें two packet या two envelope भी कहते हैं):

  1. टेक्निकल बिड: पात्रता के डॉक्यूमेंट, अनुभव, तकनीकी शर्तें पूरी करने का ब्योरा (technical compliance) और साइन किए हुए डिक्लेरेशन।
  2. फाइनेंशियल बिड: आपका रेट, जो NIC पोर्टलों पर आमतौर पर BOQ फाइल में और GeM पर प्राइस फॉर्म में भरा जाता है।

NIC पोर्टल पर बिड भरने का क्रम:

  1. अपने DSC से लॉग इन करें और टेंडर खोजें।
  2. टेंडर फीस और EMD भरें, या उनकी जानकारी दर्ज (declare) करें।
  3. हर कवर के डॉक्यूमेंट अपलोड करें, फिर भरी हुई BOQ फाइल अपलोड करें।
  4. बिड को freeze करें।
  5. पोर्टल बिड नंबर के साथ एक bid acknowledgement देता है। इसे संभालकर रखें: यही सबूत है कि आपने समय पर बिड जमा की थी।

फीस या EMD ऑनलाइन भर रहे हैं तो टेंडर बंद होने से कम से कम एक दिन पहले भरें, और बिड freeze करने से पहले Payment Verification में जाँच लें कि पेमेंट दिख रहा है। डिमांड ड्राफ्ट या बैंक गारंटी से भर रहे हैं तो उसकी स्कैन कॉपी बिड के साथ अपलोड करें और ओरिजिनल, टेंडर में बताए तरीके से, बिड खुलने से पहले पहुँचा दें। जो भी छूट (exemption) आप क्लेम करते हैं, उसे एक बार कन्फर्म करने के बाद बदला नहीं जा सकता।

आठवाँ कदम: बिड कैसे खुलती और जाँची जाती है

डेडलाइन के बाद खरीदार बिड ऑनलाइन खोलता है। आप पोर्टल पर स्टेटस देख सकते हैं, और अक्सर बिडरों को बिड खुलते समय मौजूद रहने की अनुमति होती है।

  1. टेक्निकल बिड खुलना और जाँच: एक कमेटी हर बिड को पात्रता और स्पेसिफिकेशन पर जाँचती है। जो बिड शर्तें पूरी नहीं करती, वह रिजेक्ट होती है, और उसका कारण रिकॉर्ड किया जाता है।
  2. फाइनेंशियल बिड खुलना: सिर्फ क्वालिफाई करने वाले बिडरों के रेट खोले जाते हैं।
  3. रैंकिंग: रेट के हिसाब से, सबसे कम से शुरू करके, बिडरों को L1, L2, L3 रैंक मिलती है। ज़्यादातर सामान, सर्विस और वर्क्स टेंडरों में L1 को टेंडर मिलता है। कंसल्टेंसी में अक्सर QCBS इस्तेमाल होता है, जिसमें क्वालिटी और कीमत दोनों के अंक जोड़कर फैसला होता है।

L1 से 15% के अंदर रेट देने वाले MSE अगर L1 रेट पर काम करने को तैयार हों, तो उन्हें ऑर्डर का एक हिस्सा मिल सकता है। L1, QCBS और बराबरी (tie) की स्थिति का पूरा ब्योरा बिड का मूल्यांकन कैसे होता है (अंग्रेज़ी में) में है।

नौवाँ कदम: टेंडर मिलने के बाद

  1. लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) या परचेज़ ऑर्डर: खरीदार आपको बताता है कि टेंडर आपको मिला है। दिए गए समय के अंदर इसे स्वीकार करें।
  2. परफॉर्मेंस सिक्योरिटी: सामान और सर्विस में आमतौर पर कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 3–5%, और वर्क्स में सिक्योरिटी डिपॉज़िट या रिटेंशन मनी मिलाकर 3–10% (Rule 171)। यह बैंक गारंटी या टेंडर में मंज़ूर किसी दूसरे रूप में दी जाती है, और वारंटी समेत सारी ज़िम्मेदारियाँ पूरी होने के 60 दिन बाद तक वैध रहती है। GeM पर इसे ePBG कहते हैं: यह 5% तक होती है, अवॉर्ड के 15 दिन के अंदर देनी होती है, और डायरेक्ट या L1 खरीद में इसकी ज़रूरत नहीं होती।
  3. कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट: तय समय के अंदर साइन करें। परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा होने के बाद आपकी EMD लौटा दी जाती है।
  4. सप्लाई या काम, बिल और पेमेंट: डिलीवरी शेड्यूल का पूरा पालन करें, क्योंकि देरी होने पर लिक्विडेटेड डैमेज (LD) कटता है।

टेंडर नहीं मिला तो आपकी EMD अवॉर्ड के 30 दिन के अंदर लौट आती है। रिज़ल्ट (NIC पोर्टलों पर अक्सर AOC, यानी award of contract) से पता चलता है कि टेंडर किसे और किस रेट पर मिला। अगली बिड का रेट तय करने में यह जानकारी काम आती है।

पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है

चरणआमतौर पर लगने वाला समय
DSC1–2 दिन
Udyam और पोर्टल रजिस्ट्रेशनउसी दिन से लेकर कुछ दिन
GeM सेलर अकाउंटकुछ दिन; वेंडर असेसमेंट चाहिए तो ज़्यादा
बिड तैयार करनाटेंडर के हिसाब से कुछ घंटे से दो हफ्ते तक
बिड वैलिडिटी (मूल्यांकन और अवॉर्ड)आमतौर पर 90–180 दिन; NIC पोर्टलों पर सबसे आम 90 दिन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सरकारी टेंडर कैसे मिलता है?

सरकारी टेंडर लेने के लिए आप पोर्टल पर रजिस्टर करते हैं, टेंडर की पात्रता पूरी करते हैं और डेडलाइन से पहले ऑनलाइन बिड जमा करते हैं। ज़्यादातर टेंडरों में क्वालिफाई करने वाले बिडरों में सबसे कम रेट (L1) वाले को काम मिलता है; कंसल्टेंसी जैसे कुछ टेंडरों में QCBS से क्वालिटी और कीमत दोनों देखी जाती हैं। GeM पर केंद्र सरकार के खरीदार छोटे ऑर्डर बिना बिड के भी दे सकते हैं: ₹50,000 तक डायरेक्ट परचेज़ से और ₹10 लाख तक L1 खरीद से, जिनमें आपके कैटलॉग की कीमत देखी जाती है।

क्या नई फर्म सरकारी टेंडर भर सकती है?

हाँ। कई टेंडरों में अनुभव की शर्त होती ही नहीं या कम होती है, और कई GeM बिडों में माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़ तथा DPIIT से मान्यता वाले स्टार्टअप के लिए अनुभव और टर्नओवर की शर्त में छूट होती है। शुरुआत ऐसे टेंडरों और छोटी वैल्यू के टेंडरों से करें, और पूरे किए गए ऑर्डरों का रिकॉर्ड बनाएँ।

टेंडर भरने में कितना पैसा लगता है?

GeM और NIC पोर्टलों पर रजिस्ट्रेशन मुफ्त है। अलग-अलग टेंडर में टेंडर फीस (जो वापस नहीं मिलती) और EMD (जो वापस मिलती है) माँगी जा सकती है। Rule 161 के तहत केंद्र सरकार के टेंडरों में डाउनलोड किए गए टेंडर डॉक्यूमेंट का पैसा नहीं लिया जाना चाहिए, लेकिन कई राज्य और PSU टेंडरों में अब भी फीस लगती है। GeM सेलर से पैसा तभी लेता है जब एक वित्त वर्ष (financial year) में उसके ऑर्डर ₹20 लाख तक पहुँच जाएँ; पूरी जानकारी GeM रजिस्ट्रेशन गाइड में है।

GeM पर टेंडर भरने के लिए DSC चाहिए?

आमतौर पर नहीं। GeM आपकी पहचान Aadhaar या PAN और OTP से करता है, और उसकी शर्तों में डॉक्यूमेंट पर Aadhaar आधारित e-sign की व्यवस्था है, जिसे IT Act डिजिटल सिग्नेचर के बराबर मानता है। NIC ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टलों पर Class 3 DSC ज़रूरी है।

कैसे पता चलेगा कि टेंडर मुझे मिला या नहीं?

पोर्टल पर टेंडर का स्टेटस देखें। फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद पोर्टल पर रैंकिंग दिखती है, और अवॉर्ड (NIC पोर्टलों पर AOC) में जीतने वाले बिडर का नाम होता है। खरीदार जीतने वाले बिडर को लेटर ऑफ अवॉर्ड या परचेज़ ऑर्डर भी भेजता है।

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GeM

GeM पोर्टल पर सेलर रजिस्ट्रेशन कैसे करें: डॉक्यूमेंट, फीस और स्टेप

GeM (जेम पोर्टल) पर सेलर रजिस्ट्रेशन मुफ्त है: ज़रूरी डॉक्यूमेंट, हर स्टेप, कॉशन मनी बंद होने के बाद GeM कितना चार्ज लेता है, और बिड कैसे ढूँढें।

9 मिनट में पढ़ें · अपडेट 29 Sept 2026